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Showing posts from November, 2020

Paper- 5.2, Unit- 1, कहानी

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कहानी के तत्व           कहानी जीवन के बोधात्मक , संवेदनात्मक क्षण पर आधारित होती है। जिसमें देश और जाति का कोई विशेष व्यवधान नहीं होता। उपन्यास की तरह ही कहानी के 6 तत्व होते है। 1. कथानक              कहानी को मूर्त रूप देनेवाला यह कहानी का तत्व वास्तव में एक या दो - चार संक्षिप्त घटनाओं का संचयन होता है। अनावश्यक ब्यौरे तथा वर्णनों के लिए यहां स्थान नहीं होता। संबंधता , तारतम्य , कौतुहल कथानक के अंग माने जाते है। वर्णन में सूक्ष्मता भी कथानक केलिए आवश्यक है। कहानी में कथा की मुख्य चार अवस्थाएं होती है - आरंभ , आरोह , चरम सीमा , अवरोह। कहानी के कथा आरंभ पात्र परिचय , वातावरण चित्रण या मनोचित्रण की विशेष स्थिति में होता है। घटनाएं घात - प्रतिघात आरोह कहलाएंगी। इससे उत्पन्न परिणाम चरम सीमा और अंत में जब पाठकों की उत्सुकता क्षमित होंगी तब उपसंहार होगा। 2. पात्र           कहानी की सीमा संक्षिप्त होती है। इसलिए पात्र भी संक्षिप्त होंगे। पात्रों के माध्यम से जीवन के खंड चित्रों को उजागर...

Paper 5.1, Unit- I, उपन्यास

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उपन्यास के तत्त्व : अधिकतर विद्वानों ने उपन्यास के प्रमुख छः : तत्त्व माने हैं । ( १ ) कथानक / कथावस्तु ( २ ) पात्र / चरित्र - चित्रण ( ३ ) कथोप कथन / संवाद ( ४ ) देशकाल / वातावरण ( ५ ) भाषा - शैली ( ६ ) उद्देश्य ।     ( १ ) कथानक :   कथानक किसी भी उपन्यास का पहला और सबसे महत्वपूर्ण तत्त्व है । अंग्रेजी में इसे “ प्लॉट कहते हैं । विविध घटनाओं के संयोजन को कथानक कहते हैं । डॉ . प्रतापनारायण टंडन के शब्दों में कहे तो - कथानक घटनाओं का वह साधारण या जटिल ढाँचा है , जिसके द्वारा किसी उपन्यास की रचना होती है | बगैर कथानक के किसी भी उपन्यास की कल्पना करना ही मुश्किल है । विनोदशंकरव्यास के मतानुसार - उपन्यास में कथानक का वही स्थान है जो शरीर में हड्डियों का । जिस प्रकार शरीर के लिए मांस - पेशियों आदि की आवश्यकता आवरण के रूप में होती है , उसी प्रकार भाषा , शैली और चरित्र - चित्रण की उपन्यासों में । बिना हड्डियों के जैसे मांस - पेशियाँ ...