Paper- 5.2, Unit- 1, कहानी
कहानी के तत्व कहानी जीवन के बोधात्मक , संवेदनात्मक क्षण पर आधारित होती है। जिसमें देश और जाति का कोई विशेष व्यवधान नहीं होता। उपन्यास की तरह ही कहानी के 6 तत्व होते है। 1. कथानक कहानी को मूर्त रूप देनेवाला यह कहानी का तत्व वास्तव में एक या दो - चार संक्षिप्त घटनाओं का संचयन होता है। अनावश्यक ब्यौरे तथा वर्णनों के लिए यहां स्थान नहीं होता। संबंधता , तारतम्य , कौतुहल कथानक के अंग माने जाते है। वर्णन में सूक्ष्मता भी कथानक केलिए आवश्यक है। कहानी में कथा की मुख्य चार अवस्थाएं होती है - आरंभ , आरोह , चरम सीमा , अवरोह। कहानी के कथा आरंभ पात्र परिचय , वातावरण चित्रण या मनोचित्रण की विशेष स्थिति में होता है। घटनाएं घात - प्रतिघात आरोह कहलाएंगी। इससे उत्पन्न परिणाम चरम सीमा और अंत में जब पाठकों की उत्सुकता क्षमित होंगी तब उपसंहार होगा। 2. पात्र कहानी की सीमा संक्षिप्त होती है। इसलिए पात्र भी संक्षिप्त होंगे। पात्रों के माध्यम से जीवन के खंड चित्रों को उजागर...